दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर देश के सबसे बड़े जन-आंदोलनों में से एक का केंद्र बना हुआ है। प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक, इंजीनियर और लद्दाख के अधिकारों की आवाज सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) कॉकरोच जनता पार्टी (CJP – Cockroach Janta Party) के प्रदर्शन में शामिल होकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। यह अनशन अब 11 दिन से ज्यादा पुराना हो चुका है, और उनकी सेहत को लेकर डॉक्टरों की चिंता लगातार बढ़ रही है। आइए इस आंदोलन की पूरी पृष्ठभूमि, ताजा हालात और आगे की रणनीति को विस्तार से समझते हैं।

CJP आंदोलन क्यों शुरू हुआ?

मई 2026 में आयोजित हुई देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG को कथित पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द करना पड़ा था। इसके बाद देश भर के लाखों छात्रों और अभिभावकों में भारी आक्रोश फैल गया। इसी असंतोष के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP), जिसकी अगुवाई अभिजीत दीपके कर रहे हैं, ने छात्रों, अभिभावकों, किसान संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को साथ लेकर जंतर-मंतर पर धरना शुरू किया। यह धरना जून 2026 के आखिरी हफ्ते में शुरू हुआ था और अब तक अपने 19वें दिन को पार कर चुका है।

आंदोलन की मुख्य मांगें

  1. केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: प्रदर्शनकारियों की सबसे बड़ी मांग है कि परीक्षा में हुई अनियमितताओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें।
  2. NTA को भंग करना: समर्थन में उतरे संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) को पूरी तरह भंग करने की मांग भी जोड़ दी है।
  3. पीड़ित परिवारों को मुआवजा: परीक्षा से जुड़े तनाव के चलते आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए।
  4. परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता: भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए ठोस, तकनीकी और कानूनी सुधार लागू हों।

सोनम वांगचुक का अनशन: सेहत बिगड़ने के बावजूद अडिग रुख

सोनम वांगचुक 28 जून 2026 को इस आंदोलन में शामिल हुए और छात्रों के समर्थन में अनिश्चितकालीन उपवास शुरू किया। ताजा स्वास्थ्य बुलेटिन के मुताबिक, अनशन के 11वें दिन तक वे करीब 7 किलोग्राम से अधिक वजन गंवा चुके हैं और उनका वजन घटकर लगभग 59.4 किलोग्राम रह गया है। डॉक्टरों के अनुसार उनका ब्लड प्रेशर लगातार गिर रहा है और ब्लड शुगर लेवल भी सामान्य से काफी नीचे जा चुका है, हालांकि वे अब भी मानसिक रूप से सतर्क बताए जा रहे हैं।

वांगचुक ने स्पष्ट कर दिया है कि यह उनका छठा अनशन है और इस बार वे इसे "छह हफ्ते या मृत्यु तक" जारी रखने के लिए तैयार हैं, जब तक सरकार परीक्षा प्रणाली और लद्दाख से जुड़े मुद्दों पर ठोस कदम नहीं उठाती। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की ओर से बातचीत की पहल तभी हुई जब उन्होंने अनशन का ऐलान कर दिया, जबकि एक संवेदनशील सरकार को पहले ही कदम उठा लेने चाहिए थे।

आंदोलन का विस्तार: अस्पताल भर्ती और विवाद

जैसे-जैसे अनशन लंबा खिंच रहा है, आंदोलन में शामिल अन्य प्रदर्शनकारियों की सेहत पर भी असर पड़ने लगा है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़े शोधार्थी को सीने में तेज दर्द और शरीर में हरकत न होने की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि एक व्यक्ति खुद को किसान बताकर धरना स्थल पर गुप्त रूप से वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहा था, जो असल में दिल्ली पुलिस का अधिकारी निकला। CJP ने इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन की निगरानी और प्रदर्शनकारियों को डराने की कोशिश करार दिया है। वहीं दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में CJP का एक्स (X) अकाउंट बहाल करने का आदेश भी दिया है, जो पहले निलंबित कर दिया गया था।

लद्दाख का मुद्दा: दिल्ली आंदोलन से क्या है कनेक्शन?

सोनम वांगचुक सिर्फ शिक्षा सुधार के लिए नहीं, बल्कि लद्दाख की लंबित मांगों को लेकर भी वर्षों से आवाज उठाते रहे हैं। वर्ष 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था, जो सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आता है। लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के साथ मिलकर वांगचुक लद्दाख के लिए 4-सूत्रीय एजेंडे पर जोर देते रहे हैं:

  1. लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए।
  2. संविधान की छठी अनुसूची के तहत स्थानीय जनजातीय संस्कृति व पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
  3. लद्दाख के युवाओं के लिए अलग लोक सेवा आयोग बने।
  4. लेह और कारगिल के लिए अलग-अलग लोकसभा सीटें तय हों।

गौरतलब है कि हाल के दिनों में सरकार ने लद्दाख से जुड़े कुछ मुद्दों पर कदम उठाए हैं, जिसके लिए CJP ने आभार भी जताया, लेकिन शिक्षा जवाबदेही से जुड़ी मांगों पर अब भी गतिरोध बरकरार है।

छात्रों की आत्महत्याएं: आंदोलन का सबसे संवेदनशील पहलू

इस आंदोलन का सबसे भावुक पहलू छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य है। NEET विवाद के बाद देश में 20 से अधिक छात्रों की आत्महत्या की खबरें सामने आई थीं, जबकि वांगचुक ने लद्दाख में भी पिछले साल पांच युवाओं की मौत का जिक्र करते हुए कहा कि उनका बलिदान इन घटनाओं के मुकाबले कुछ भी नहीं है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह लड़ाई राजनीति नहीं, बल्कि देश के भविष्य को बचाने की लड़ाई है।

आगे की रणनीति: संसद मार्च की तैयारी

आंदोलनकारियों और सरकार के बीच गतिरोध अब भी बना हुआ है। CJP प्रवक्ताओं का आरोप है कि इतने दिनों के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस बातचीत शुरू नहीं हुई है। संगठन ने प्रधानमंत्री को खुला पत्र लिखकर आंदोलन पर सरकार की "चुप्पी" तोड़ने की अपील भी की है। इसे देखते हुए CJP ने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन, 20 जुलाई 2026, को बड़े पैमाने पर 'संसद मार्च' करने का ऐलान किया है, जिसमें देशभर से छात्रों, अभिभावकों और नागरिकों को शामिल होने का आह्वान किया गया है।

आंदोलन की मुख्य बातें: एक नजर में

बिंदु विवरण
आंदोलन का स्थानजंतर-मंतर, नई दिल्ली
धरना शुरू होने की तारीखजून 2026 का अंतिम सप्ताह
वांगचुक के अनशन की शुरुआत28 जून 2026
प्रमुख नेतासोनम वांगचुक, अभिजीत दीपके (CJP संस्थापक)
मुख्य मांगेंशिक्षा मंत्री का इस्तीफा, NTA को भंग करना, परीक्षा सुधार, लद्दाख की मांगें
समर्थक समूहछात्र, AISA, संयुक्त किसान मोर्चा, नागरिक समाज संगठन
आगे की रणनीति20 जुलाई 2026 को 'संसद मार्च'

निष्कर्ष

CJP का यह आंदोलन और सोनम वांगचुक का अनशन भारत में शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही और लद्दाख के संवैधानिक अधिकारों, दोनों मुद्दों को एक साथ राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ले आया है। एक तरफ छात्र परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता मांग रहे हैं, तो दूसरी तरफ लद्दाख अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए आवाज उठा रहा है। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या सरकार मानसून सत्र से पहले प्रदर्शनकारियों से बातचीत की मेज पर बैठेगी, या 20 जुलाई का प्रस्तावित संसद मार्च आंदोलन को एक नया और बड़ा मोड़ देगा।

यह एक लगातार बदलता हुआ घटनाक्रम है, इसलिए ताजा अपडेट के लिए विश्वसनीय समाचार स्रोतों पर नजर बनाए रखना जरूरी है।

यह लेख उपलब्ध समाचार रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है और इसका उद्देश्य निष्पक्ष जानकारी देना है। आंदोलन से जुड़े आंकड़े (जैसे दिन की गिनती, वजन घटना) समय के साथ बदल सकते हैं।